*बाल श्रम विद्यालय संचालन पर गैर जनपदों का दबदबा।*
*मानक दरकिनार कर हुआ चयन ,आखिर जद्दोजहद के बीच बाल श्रमिक विद्यालय संचालित करने वाली संस्थाओ को नामित कर दिया गया*
*फतेहपुर जिले की चिन्हित बाल श्रमिक बस्तियों मे स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा 34 बाल श्रमिक विद्यालय संचालित किए जाने है,जिसके लिए संस्थाओ से बाकायदा आवेदन लेकर इण्टर व्यू भी लिया गया लेकिन गांधी जी के आगे सारी सिफारिशें व योग्यता धरी की धरी रह गयी*
*गैर जनपद वह भी बनारस प्रतापगढ़ तथा कौशांबी की संस्थाओ ने बाजी मारी है,विभाग के कर्ताधर्ता असिस्टेंट लेवर कमिश्नर के निवास स्थान वाले जिले प्रयागराज की संस्थाए भी खासी तादात मे विद्यालय संचालन के लिए नामित हुई है।*
*फतेहपुर जिले की जनशक्ति वाहिनी को छोंड दे जो सदर विधायक की अगुवाई मे संचालित होती है उसे तीन विद्यालय आवंटित हुए है,इसके अलावा जिले की जो संस्थाएं पिछली बार दो विद्यालय संचालित कर रही थी उन्हें एक विद्यालय भी नही दिया गया यह अलग बात है कि कुछ संस्थाओ को एक एक विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी देकर जिले के काम पर जिले की संस्थाओ की भागीदारी ज्यादा दिखाने का खेल किया गया है*
*वही गैर जनपद की संस्थाओ को दो दो विद्यालय देकर उपक्रत किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि जिन संस्थाओ के पास इसके पहले स्कूल संचालन का कोई अनुभव नही है उन संस्थाओ को किस मानक व किस मजबूरी मे काम की जिम्मेदारी सौपी गयी।*
*योगी राज मे जहां पारदर्शी कार्य की बात हो रही है वही जिले के जिम्मेदार नियम कानून को ताक मे रखकर मनमानी पर उतारु है।*
बाल श्रमिक विद्यालय आवंटन में बड़ा खेल